Sri Kashi Vishanathashtakam in Devanagari | श्री काशी विश्वनाथाष्टकम् देवनागरी मे [ PDF ]

Sri Kashi Vishwanathashtakam in Devanagari
श्री काशी विश्वनाथ स्तोत्रम् देवनागरी में | श्री काशी विश्वनाथाष्टकम् भगवान शिव की महिमा का गुणगान करने वाला एक अत्यंत सुंदर और प्रभावशाली संस्कृत स्तोत्र है। यह अष्टक (आठ श्लोकों का समूह) विशेष रूप से वाराणसी (काशी) के अधिपति, भगवान श्री विश्वनाथ को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस स्तोत्र की रचना स्वयं श्रीमहर्षि व्यास ने की थी। यह स्तोत्र भगवान शिव के विभिन्न दिव्य गुणों, रूपों और उनकी कृपा का वर्णन करता है, और इसके पाठ से लौकिक तथा पारलौकिक दोनों प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं।
Language: Sanskritam
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Source: Sanskrit Pustakalaya
॥ श्रीकाशीविश्वनाथाष्टकम् ॥
लेखक: महर्षि व्यास
विषय: वाराणसी के अधिपति भगवान श्री विश्वनाथ (शिवजी) की स्तुति
श्रीकाशीविश्वनाथाष्टकम्, भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली और हृदयस्पर्शी स्तोत्र है, जिसकी रचना महर्षि व्यास द्वारा की गई है। यह स्तोत्र आठ श्लोकों में भगवान काशी विश्वनाथ के रूप, गुण, स्वरूप, तेज, और उनके भक्तों के प्रति करुणा का मनोहारी वर्णन करता है।
स्तोत्र की विशेषताएँ:
- काशीश्वर रूप: भगवान शिव को काशी (वाराणसी) के अधिपति के रूप में पूजा जाता है। यह स्तोत्र उन्हें वाराणसीपुरपतिं कहकर बार-बार नमन करता है।
- रूप-वर्णन: गङ्गा के जल से सजी जटा, त्रिनेत्र, भुजगों की भूषण, व्याघ्रचर्मधारी स्वरूप – शिव के प्रत्येक दिव्य गुण को यह स्तोत्र उजागर करता है।
- अद्वितीय स्वरूप: यह शिव को निर्गुण-सगुण दोनों रूपों में स्वीकार करता है – “तेजोमयं सगुणनिर्गुणमद्वितीयम्”।
- भक्तिरस: स्तोत्र में भक्ति का ऐसा सागर प्रवाहित होता है कि पाठक शिव के प्रति पूर्ण समर्पण अनुभव करता है।
- फलश्रुति: इस स्तोत्र को शिव-सन्निधि में श्रद्धा से पाठ करने से ज्ञान, ऐश्वर्य, सुख, कीर्ति और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
फलश्रुति का सार:
जो भी मनुष्य भगवान काशी विश्वनाथ का यह अष्टक पाठ करता है, वह विद्यायुक्त, धन-सम्पन्न, सुखी, यशस्वी होता है और अंत समय में शिवलोक को प्राप्त करता है।
स्तोत्र का आध्यात्मिक संदेश:
यह स्तोत्र न केवल शिव की उपासना का माध्यम है, बल्कि साधक को वैराग्य, शांति, विनम्रता और आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करता है। शिव को केवल भूतभावन या कालान्तक के रूप में ही नहीं, अपितु सहज, सौम्य और करुणामय रूप में भी यहां चित्रित किया गया है।
निष्कर्ष:
श्रीकाशीविश्वनाथाष्टकम् एक ऐसा आध्यात्मिक रत्न है जो भक्त को शिवमय बना देता है। इसका नित्य पाठ, विशेषतः काशी में, अत्यंत पुण्यदायक एवं मोक्षप्रद माना गया है। शिवभक्तों के लिए यह स्तोत्र अनमोल निधि है।
॥ हर हर महादेव ॥

