Sundarkandam From Ramcharitmanas in Devanagari Created by Tulasai Das | सुन्दरकण्ड तुलसी दास विरचित रामचरित मानस से [ PDF ]

Language: Awadhi
Publisher: Not specified
Year of Publication: Not specified
File Size: 384KB
Total Pages: 42
Author: Tulsidas
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Place of Printing: Not specified
Source: Internet Archive
सुन्दरकाण्ड
तुलसीदास विरचित श्रीरामचरितमानस से
काण्ड क्रम: पाँचवाँ (रामचरितमानस में)
मुख्य नायक: श्री हनुमान
कथा-स्थान: हनुमानजी द्वारा लंका की यात्रा, सीता माता का दर्शन, और रामकथा का प्रचार
सुन्दरकाण्ड क्यों कहा जाता है?
इस काण्ड को “सुन्दर” इसलिए कहा गया है क्योंकि इसमें **हनुमानजी का सुन्दर रूप, सुन्दर कार्य, सुन्दर वाणी और सुन्दर भक्ति** का अद्भुत चित्रण हुआ है। यहाँ तक कि लंका में सीता माता भी हनुमानजी को “सुन्दर स्वरूप” कहती हैं। साथ ही, यह काण्ड भक्तों के लिए भी कल्याणकारी और मंगलमय माना गया है।
मुख्य घटनाएँ:
- हनुमानजी का समुद्र लांघना
- सिंहिका और सुरसा से सामना
- लंका-दहन और अक्षयकुमार वध
- अशोक वाटिका में सीताजी से संवाद
- रामनाम अंगूठी देना और रामकथा सुनाना
- रावण को चेतावनी और विभीषण से भेंट
- श्रीराम के पास लौटना और समाचार देना
भक्ति, शक्ति और नीति का अद्भुत संगम:
सुन्दरकाण्ड में तुलसीदासजी ने हनुमानजी के माध्यम से हमें यह दिखाया है कि **सच्ची भक्ति, निःस्वार्थ सेवा और प्रभु पर पूर्ण विश्वास** से असंभव को भी संभव किया जा सकता है। यह काण्ड न केवल कथा की दृष्टि से महान है, बल्कि इसमें जीवन जीने की शिक्षा भी निहित है।
फलश्रुति (पाठ के लाभ):
जो भी श्रद्धा से सुन्दरकाण्ड का पाठ करता है, उसकी समस्त विपत्तियाँ दूर होती हैं, भय समाप्त होता है, और जीवन में विजय, सुख, और शांति की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ अति फलदायक माना गया है।
॥ जय श्रीराम ॥
॥ श्री हनुमते नमः ॥

