Bhaja Yatirajstotram Text With | भज यतिराजम् ( यतिराज स्तोत्रम् ) PDF

भज यतिराजम् स्तोत्रम् (Bhaja Yatiraj Stotram)
श्रीरामानुजाचार्य जी को समर्पित यह स्तोत्रम् भक्तिपूर्वक गाया गया है।
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Source: SanskritPustakalaya
यह स्तोत्र श्री यतिराज (रामानुजाचार्य) की स्तुति में रचित है। इसके पाठ से भक्त को ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की प्राप्ति होती है। “भज यतिराजं भवभीरो” — यह उद्घोष मात्र एक काव्य पंक्ति नहीं, बल्कि समस्त विष्णुभक्त परंपरा की ओर से शरणागत जीव की अंतिम पुकार है। यह स्तोत्र कविराह कौण्डिन्य द्वारा रचित है और इसके केंद्र में हैं — श्रीरामानुजाचार्य, जो न केवल विशिष्टाद्वैत वेदान्त के संस्थापक हैं, बल्कि दिव्य भक्तियोग के व्यवहारिक आचार्य भी । 11वीं सदी के दक्षिण भारत में वैदिक ज्ञान उच्च वर्ग तक सीमित हो गया था। रामानुजाचार्य ने वेद, उपनिषद और भगवद्गीता को हर वर्ग के लिए सुलभ बनाया। उन्होंने शरणागति को केवल दार्शनिक विचार नहीं, बल्कि जीवन्मुक्ति का व्यावहारिक साधन बताया। यही सन्देश “यतिराज स्तोत्रम्” में कवि कौण्डिन्य ने भक्ति, ज्ञान और व्यंग्य के माध्यम से दिया है। यह स्तोत्र काव्य के माधुर्य और साधना के मार्ग का संगम है। कविता में भक्ति का रस है, तो विवेक का तीखापन भी। एक ओर रामानुज की महिमा है, तो दूसरी ओर मिथ्याचार पर तीव्र व्यंग्य।
