Vivah Paddhati With Hindi | विवाह पद्धति भाषा टीका सहित PDF

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Author: Pandit Ramswaroop Sharma ji
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विवाह की शास्त्रीय परंपरा: ब्राह्म विवाह की महत्ता और आवश्यक सामग्री
सज्जन वृन्द!
सनातन धर्म में विवाह केवल एक सामाजिक बंधन नहीं, अपितु एक पवित्र यज्ञ है, जो धर्म, अर्थ और काम की साधना हेतु एक श्रेष्ठ साधन माना गया है।
गान्धर्वो राक्षसश्चैव पैशाचश्चाष्टमोऽधमः ॥
अर्थात विवाह के आठ प्रकार हैं:
- ब्राह्म
- दैव
- आर्ष
- प्राजापत्य
- आसुर
- गान्धर्व
- राक्षस
- पैशाच
इनमें से पहले चार विवाह प्रकारों को ही शास्त्रों ने श्रेष्ठ और सात्विक माना है। विशेषकर ब्राह्म विवाह को सबसे उत्तम, सर्वमान्य और धर्मसम्मत घोषित किया गया है।
ब्राह्म विवाह का उद्देश्य एवं विशेषता
ब्राह्म विवाह वह है जिसमें योग्य कन्या को विद्या, शील और कुल के अनुसार सुयोग्य वर को स्वयं दान किया जाता है, बिना किसी लेन-देन या कामना के। यह विवाह पद्धति संस्कार, सदाचार और धर्मबुद्धि पर आधारित है।
इस पद्धति को ध्यान में रखते हुए पं० रामस्वरूप शर्मा जी (मेरठ निवासी) ने एक अत्यंत उपयोगी और सरल विधिपुस्तिका की रचना की है, जिससे कम पढ़े-लिखे पण्डितजन भी विवाह संस्कार को उचित रीति से सम्पन्न करा सकते हैं।
विवाह सामग्री (आवश्यक वस्तुएँ)
- धूप — शुद्ध वातावरण एवं देवताओं के पूजन हेतु
- रुई (कच्ची) — बाती बनाने हेतु
- हार (१०) — वर-वधू को पहनाने हेतु
- सुपारी (२०, पंचरंग) — देवताओं का आवाहन और आदर हेतु
- आसन (४) — वर-वधू, पण्डित, ब्राह्मण हेतु
- धोती, अंगोछा — ब्राह्मण पूजन या वर के लिए
- ब्राह्मण को (१) — ब्राह्मण भोजन/दक्षिणा हेतु
- सिन्दूर — मांग भराई की क्रिया के लिए
- मटकैने (२) — मंगल कलश हेतु
- गाय गोदान का सामान — प्रतीकात्मक गोदान (धर्म हेतु)
उद्देश्य और लाभ
इस विधिपुस्तिका और पद्धति का मुख्य उद्देश्य यह है कि विवाह संस्कार को सरल, सुगम और धर्मानुकूल बनाया जाए। ब्राह्म विवाह को पुनः समाज में प्रतिष्ठित किया जाए ताकि यह यज्ञ स्वरूप विवाह आज के युग में भी अपनी दिव्यता को प्राप्त कर सके।

