Hayagreeva Stotram | हयग्रीव स्तोत्रम् संस्कृत PDF

Hayagreeva Stotram PDF
हयग्रीवस्तोत्रम् संस्कृत
Publisher: NSanskrit Pustkalaya dot Com
Year of Publication: E D 2025
File Size: 50KB
Total Pages: 8
Author: Vedanta Deshik
Editor: Devraj Sharma
Printer: Ebook
Place of Printing: Not specified
Source: Sanskrit Pustakalaya
ज्ञानानन्द मयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम् । आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवम् उपास्महे ॥ १ ॥
यह स्तोत्र वेदांताचार्य श्री वेङ्कटनाथ (वेदान्तदेशिक) द्वारा रचा गया है, जो कविता और तर्क के शेर कहे जाते हैं।
हम हयग्रीव देवता की उपासना करते हैं, जो ज्ञान और आनंद स्वरूप हैं, जिनका रूप निर्मल स्फटिक के समान है, और जो समस्त विद्याओं के मूलाधार हैं।
उनका स्वरूप स्फटिक मणियों से भी उज्ज्वल है, उनकी पुकार अमृत-सी ध्वनि से युक्त है, और वे त्रिभुवन को पवित्र करनेवाले हैं।
उनकी ध्वनि अज्ञानरूपी अंधकार को हरने वाली है, और वे वेदों की सार-ध्वनि के स्वामी हैं। वेदों की वाणी रूप, सम, ऋच, यजुष—उन सबका वे सार हैं।