Yagyavalkya Shiksha, Yajnavalkya Shiksha | याज्ञवल्क्य शिक्षा [ PDF ]

याज्ञवल्क्य शिक्षा (Yajnavalkya Shiksha)
याज्ञवल्क्य शिक्षा एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैदिक ग्रंथ है, जो शास्त्रीय उच्चारण, स्वरों की महत्ता, वर्णों की उत्पत्ति तथा शुद्ध पाठ पद्धति पर प्रकाश डालता है। यदि आप वैदिक ज्ञान के मूल स्रोतों की खोज में हैं, तो “याज्ञवल्क्य शिक्षा” एक अमूल्य निधि है जिसे अवश्य पढ़ा जाना चाहिए।
Publisher: Shri Pratapsingh Trust
Year of Publication: Chaitra 2024 V.S. / March 1967 A.D.
File Size: 11.6MB
Total Pages: 124
Author: Swami Brahmamuni Parivraajak Vidyamartanda
Editor: –
Printer: –
Place of Printing: Arya Sahitya Maydatt, Ajmer
Source: Internet Archive
याज्ञवल्क्य शिक्षा एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैदिक ग्रंथ है, जो शास्त्रीय उच्चारण, स्वरों की महत्ता, वर्णों की उत्पत्ति तथा शुद्ध पाठ पद्धति पर प्रकाश डालता है। यह ग्रंथ वेदांगों में से एक “शिक्षा” शाखा से संबंधित है। स्वामी ब्रह्ममुनि परिव्राजक विद्यावार्तण्ड द्वारा यह संस्करण गुरुकुल फांगड़ी (हरिद्वार) में संपादित किया गया है तथा इसका प्रकाशन श्री प्रतापसिंह ट्रस्ट द्वारा आर्य साहित्य मयदत्त, अजमेर से हुआ है। ग्रंथ में स्वर, व्यंजन, उच्चारण स्थान, उच्चारण विधि, समय, मात्रा एवं वेदों के शुद्ध पाठ हेतु नियमों का विस्तार से विवेचन किया गया है। इसकी भाषा संस्कृत है, परन्तु साथ ही हिंदी में टीका और व्याख्या भी दी गई है जिससे सामान्य पाठक, विद्यार्थी और शोधार्थी भी इस ग्रंथ को आसानी से समझ सकें। यह ग्रंथ वेदपाठियों, संस्कृत के छात्रों, तथा उन सभी के लिए अत्यंत उपयोगी है जो वैदिक परंपरा, उच्चारण विज्ञान (phonetics) और वैदिक भाषा संरचना में रुचि रखते हैं। इसमें कुल 124 पृष्ठ हैं और यह लगभग 11.6MB आकार में उपलब्ध है। पुस्तक का मूल स्त्रोत इंटरनेट आर्काइव है तथा यह संस्कृतबुक्स डॉट कॉम से डाउनलोड हेतु उपलब्ध है। यदि आप वैदिक ज्ञान के मूल स्रोतों की खोज में हैं, तो “याज्ञवल्क्य शिक्षा” एक अमूल्य निधि है जिसे अवश्य पढ़ा जाना चाहिए।

